फिर शुरू की है
उठ के अपनी जिंदगानी फिर शुरू की है
आज से अपनी कहानी फिर शुरू की है

फिर से अपना ये कदम मैंने बढ़ाया है
एक तीर को फिर चाप पर मैंने चढ़ाया है
फिर से लक्ष्य पर मेरी निगाहें अड़ गई है अब
इसको बेध जाने की ललक भी बढ़ गई है अब

रण सी ही भेरी बजानी फिर शुरू की है
आज से अपनी कहानी फिर शुरू की है

निकल मैं फिर पड़ा हूं अब पुराने द्रोह के पथ पर
साहस की सड़क पर और अपनी बुद्धि के रथ पर
पुराना आत्मबल मेरा हुआ पहले से भी मजबूत
चारों ओर हैं मेरे खड़े सद्भावना के दूत

जंग वो वर्षों पुरानी फिर शुरू की है
आज से अपनी कहानी फिर शुरू की है

जितना हो सके मुझसे उतना सब करूंगा मैं
अपने हाथ से अब नए-नए करतब करुंगा मैं
मिथक टूटेंगे सब और लोग अपनी बात बदलेंगे
भरोसा पूरा है जल्दी ही ये हालात बदलेंगे

उम्मीद की फसलें उगानी फिर शुरू की है
आज से अपनी कहानी फिर शुरू की है

द्वारा Vikram Kumar
Shared23 Mar 2025
Start 23 Mar 2025
End 23 Mar 2030
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