3 2 3828 3 3828 जीवन का एक पड़ाव तम सा छाया सफर उम्र का वो घोल कैसे समझू इसको जीवन है अनमोल। आस भरी है इसमें उम्मीदों की डोर मन को यह भ्रमित करें जाऊं मैं किस ओर जिंदगी क्षण भर की क्यूं भटकूं दर बदर लक्ष्य एक साध कर जी लू इसको जी भर ढले सांझ जब भी रह न जाए मोल जीवन के इस घटक को कर दू मैं अनमोल.... Label Directed by द्वारा Kapil Tiwari Shared05 Sep 2025 Start 05 Sep 2025 End 05 Sep 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Sachin Jain 28-Dec-2025 Comment Like अत्युत्तम सृजन Manali Jain 27-Jan-2026 Comment Like बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं। जीवन का एक पड़ाव © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें