2 2 4654 2 4654 लौ आलोकित पहरा देते सीमा पर, शूर वीरसैनिक चौकस।भारत माँ के वे रक्षक, सर्दी हो या हो पावस।।धूप ठंड हो कंप प्रलय, राष्ट्र प्रेम लौ आलोकित।भारत माता की जय-जय, विजय गान चहुँ दिशि गूंजित।।स्वरचित मौलिक रचना चंचल जैनमुंबई, महाराष्ट्र Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared27 Jun 2025 Start 27 Jun 2025 End 27 Jun 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 27-Jun-2025 Comment Like जयहिन्द Jain Mikhil 18-Jan-2026 Comment Like लाजवाब ❤️🙏❤️🙏❤️ लौ आलोकित © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें