मयखाने के शूरवीर

बेवड़ों के हलक से दारु नीचे खिसकी नहीं कि ये अपने आप को

रॉबिनहुड से कम नहीं समझने लगते हैं |

 

इनके अपने ही फंडे होते हैं |  ये कहते हैं कि … इस धरती पर पहले सुरा हुई   

फिर सुर हुए   फिर सुर से नर और फिर मुनि | 

 

मुझे नहीं मालूम ये कितना सही है कितना गलत | 

लेकिन ये सुनकर मैं सोचने लगा की इसमें असुर का नाम नहीं आया |  

सुर से डायरेक्ट नर मुनि बन गए |  ये ससुरा असुर कहाँ गया |

 

बस यही सोचते सोचते … सुरा से उपजे इन महानुभावों से …

मैं प्रेरित हुआ … और व्यंग्य भाव से  इनकी शान में कुछ

स्वरचित पंक्तियाँ पेश करने की  हिमाक़त कर रहा हूँ …|

 

 

मयखाने के शूरवीर

क्यूँ होता है इतना अधीर |

मत हो इतना संताप ग्रस्त

होने को है अब सूर्य अस्त ||

 

चल भूले बिसरे गीत बजा

कर दे अपनी रंगीन फ़िज़ा |

जब तेरे मन की यही रज़ा

तो पी पी के खप जा मुक जा  ||

 

तू भर प्याला न कर विचार

लब पे लगा नीचे उतार |

फिर दे उड़ेल तू बार बार

तू वीर न माने कभी हार ||

 

उठ देह दमन का दम्भ छोड़

ये व्यर्थ के शिष्टाचार तोड़ |

बोतल पकड़ गर्दन मरोड़

हर बूँद तू उसकी ले निचोड़ ||

 

ये नीम्बू पानी के कुनबे

सब खिन्न खिन्न ऊबे ऊबे |

इनके पीड़ाग्रस्त ख्यालों में

तू क्यों उत्पीड़ित हो डूबे ||

 

ये दूधपरस्ते क्या जाने

इस सुरा सुरीली की चसक |

जब उठती है इसकी कसक

मन हौले हौले ले ठसक ||

 

जब इसकी महक घुसे तन में

मन कुहू कुहू बोल उठे |

ये कामदेव का प्रेम बाण

जब चले तो धरती डोल उठे ||

 

तेरे हृदय का दयाभाव

हर घूंट घूंट बढ़ता जाए |

तू खम्बे से भी टकराये

तो क्षमा याचना कर जाए ||

 

तू डगमग डगमग डोल चले

हर दिशा में तेरा कदम डले |

तू लहर लहर सा झूम झूम

उठते पड़ते ले हिचकोले ||

 

 

तू प्रकृति प्रेम से भरा हुआ

दलदल में ऐसे पड़ा हुआ |

मानो धरती के मस्तक  पर

इक फूल सड़ा सा जड़ा हुआ ||

 

तू सुरा से उपजा जुगनू सा

कीचड़ में टिम टिम करता है|

वो गली का कुत्ता टांग उठा

तेरे पर रिम झिम करता है ||

 

यूँ एक छटंकी भर का तू

दो घूंट में होता सवा सेर |

इस सुरा की छींटें पड़ते ही

चूहे से उमड़ के बने शेर ||

 

अब आखिर में तू मेरी सुन  

बस खींच दे अब अपनी लकीर |

इस नशे के टंटे में मिट कर

मत पापी बन मत बन फ़कीर ||

 

मत पैमाने में डूब के मर

कुछ तो सुन क्या कहता ज़मीर |

मयखाने के शूरवीर

मयखाने के शूरवीर ||

 

चंद्र मोहन कत्याल

ग्रेटर नॉएडा उत्तर प्रदेश-201310 भारत

 


द्वारा chandra katyal
Shared21 Jul 2026
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