धूप सेंकें हेमंत ऋतु की,अगर सेहत बनानी हो।।
हड्डियों को मजबूत करना,देखो दादी नानी को।।
अहसास करना हेमंत का,कर अनुभूति आनंद की।
मजे लीजिए खान पान के,बात अलग कलाकंद की।।
गर्म गर्म चाय की चुस्कियां,पीयो डालो काला मिर्चा ।।
डाल दो अदरक की कतरनें ,फिर कर मौसम की चर्चा ।।
गोंद के लड्डू घी डलें हो,लो तिल पट्टी गुड़ वाली।
खाना बाजरे की रोटियां,कढी पकौड़ी की प्याली।।
गाजर मूली मटर फलियाॅं,सजे पड़े बाजारों में ।
लाओ और सब्जी बनाओ,भूनो तलो बघारों में ।।
रजाइयां जयपुर से लालों,तन गर्माहट लाती है।
गर्म स्वेटर और मफलर से,ठंड वंड उड़ जाती है।।
अगर हो अर्थ सक्षमता तो,गर्म कंबल दान करो।
पड़ा बिन उपयोगी स्वेटर, किसी दीन को प्रदान करो।।
स्वरचित:अशोक दोशी