ज़िन्दगी का लहराता आँचल....

जिंदगी का लहराता आँचल, कस के पकड़ लूँ … 

फ़िसल न जाये हसीं लम्हा, बाँहों में जखड़ लूँ .... 

तूफान में उम्मीदों की कश्ती, दरिया को थमा दूँ .... 

बादलों से लुकाछुपी खेल, इन्द्रधनु सजा दूँ .... 

 

ये जिंदगी! तेरी रहमतों को, झोली में समेट लूँ … 

गुलाब संग काँटों को भी, गले से लगा लूँ .... 

उम्मीदों के पंखों पर सवार हो, कुछ पल जी लूँ .... 

दोस्तों संग मिल बैठ, जिंदगी का जाम पी लूँ ....

शाम है ढलने को अब, सूरज से विदा ले लूं...

कल मिले, न मिले, आओ! गले मिल लूं!!

 

स्वरचित तथा मौलिक,

कुसुम अशोक सुराणा,

 

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