लम्हा-लम्हा मुझसे कहता है
तू अगले की तैयारी कर,
भटक रहा है क्यूं क्षण-क्षण
मन से कहो बेगारी कर..
बूंद-बूंद से घट भरता है
तिनके-तिनके से बनता है नीड़,
एक काम पर फोकस करलो
नहीं करोगे, हो जाओगे क्षीण..
दौर शुरू होगा करने का
एक के बाद एक, होंगे सब पूर्ण
सिलसिला यह चलता रहेगा
न रहेगी कोई चाहत अपूर्ण..
जोर लगा दो अपने दम का
अब पूरी तैयारी है,
चार कदम चलो रोते-रोते
फिर हंसने की बारी है...
-KAPIL TIWARI