मेरे पापा
नमन माँ शारदे
फादर्स डे की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं। 

मेरे पापा, हमारे बाप्पा ' 

पापा इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थे। उस जमाने में विद्यार्थी शिक्षकों का पूरा आदर सम्मान करते थे। गर्व था, अभिमान था हमें अध्यापक पिताजी का, अपने विद्यार्थियों से स्नेह से बतियाते हमारे बाप्पा, शिक्षादान का काम पूर्ण समर्पण और तन्मयता से करते थे। घर का सारा कामकाज मां कुशलता से संभालती। खूब प्यार-दुलार मिला हमें माता-,पिता का। स्कूल से घर आते ही हम सब साथ में खाना खाते और अनुशासन प्रिय पापा के साथ पढ़ने बैठ जाते। पढ़ाई के बाद रेडियो पर नाटक, कहानी सुनते। 'बेला के फूल', 'भूले बिसरे गीत' सुनते सुनते पढ़ाई, खेलना, और कोई काम होता रहता। लाइब्रेरी से लायी कहानी की किताब बारी बारी पढ़ते। सीधी-साधी जिंदगी। कोई तनाव नहीं। किसी चीज की कमतरता से, असंतुष्टि का एहसास नहीं। हंसी-मजाक, खेल-कूद, मौजमस्ती से भरपूर।
अब जब सारी सहूलियतें हैं, ढेर सारी सुविधाएं हैं, मन अतृप्त है। शांति, सुकून,आनंद अनुभूति नहीं। अनजाना डर, अविश्वास की झीणी चादर, तनावग्रस्त मन। जिंदगी बोझिल हो गयी हैं। आत्मीयता की नमीं बिना शुष्क हो रहा हैं मन। पालनाघर में बिलखता बचपन, अति महत्वाकांक्षी मायूस लड़कपन, बेरोजगारी की मार से कुंठित यौवन, वृद्धाश्रम में धुंधलाती नजरों से अपनों को ढूंढते बुजुर्ग। कहाँ, किस ओर जा रही हैं जिंदगी की गाड़ी? हर पल बेचैनी, चिड़चिड़ापन बीमार मानसिकता को जन्म दे रहा हैं। मनोरोगी, रुग्ण हो रही हैं हमारी सामाजिक व्यवस्था। भूल गए हम खिलखिलाकर हंसना। रोते भी हैं हो छुपछुपकर। क्या यह मानव जीवन की विडंबना नहीं? कुछ सोचो, समझो, जीवन का रहस्य जानो। जिओ और जीने दो। खुश रहो, खुशियां बांटो। मुस्कुराहट से अपनी आसपास महका दो। कल की चिंता, आज न बिगाड़ो। जी भर जियो। बड़े सौभाग्य से मिला हैं मानव भव, सत्कर्मों से दीपाओ।
पापा, आपकी बहुत याद आती है। हम आपके बताये पथ.पर चलने की पूरी कोशिश करते है। देखो न पापा, आपकी तरह हमारी कलम सार्थक लेखन का प्रयास कर रही है।
आप आशीष बरसाये रहना पापा।

चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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