महामंगला छंद आधारित कविता : बाज! महामंगला छंद आधारित रचना।

खो कर अपना वतन, देगा कैसे धीर।
देख राष्ट्र का पतन, बढ़ी मनुज की पीर।
युद्ध नाश की वजह, हथियारों की होड़।
जागो जन-गण सकल, ढूंढो विधिवत तोड़।।

सदा संप्रभु-सजग, हो मनु अपना देश।
बुरी जहाँ हो नज़र, खल-संहारक आवेश।
देना उनको सबक, अपने जो गद्दार।
करना मस्तक अलग , भू माता का भार।।

समझौता क्यों अटल, सेना जब मजबूत।
शान्ति दूत क्यों विकल, बांका हो जब पूत।
दिवा स्वप्न है अमन, अहंकार का ताज।
नीरव नभ का पथिक, घायल है जब बाज।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।

इस पर लोग क्या कह रहे हैं