म्हारो रंगीलो मारवाड...
शुरवीरों री आ जन्मभूमी,
वीरांगनाओं री कर्मभूमी,
घणी घणी सुहावे म्हाने,
धोरा री धरणी आ वीरभूमी।।
रेतलड़ी रा टीला सुनहरा,
नाचे मोर करे टहुकारा,
भाव भक्ति अर्चना झंकारा,
बाजे ढोल, झूमे मन मोरा।।
पत्तल माते कुल्फी खाओ,
चूरमा लाडू, घेवर खाओ,
गट्टारो साग, पंचकुटो तीखो,
लागे स्वाद घणो घणो चोखो।।
आवो चालो, ठंडाई बनाओ,
घूमर, बाजोटियो, रंग जमाओं,
मनुहार करे मीठी बोली प्यारी,
मिलनी रो सुख आनंद पाओ।।
गाँव री घणी घणी ओरु आवे,
हिवड़ो हरखे, मन फुलडा गावे,
नाचे ठुमक ठुमक मनड़ो म्हारो,
रूमक झुमक पधारो, बुलावे।।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र