चिराग

जलाओ अनगिन चिराग .....

जिंदगी में चाहते हो, रोशनी अगर,
जला दो उम्मीद के अनगिन चिराग।।

हौसले की स्नेह भरी बाती हो,
साहस और सतत अभ्यास ज्योति हो।।

हर इम्तहान का कौशल से स्वागत हो,
ज्ञान प्रकाश से जीवन दीप प्रदीप हो।।

जीवन में यश, प्रतिष्ठा का उजास हो,
अंधियारी गलियों में चिराग जलाने की मनीषा हो।।

स्वयं बनो ऐसा चिराग, जीवन जगमग करे। 
सबकी आँखों में रोशनी का ख्वाब सजे।।

स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र
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