बचपन...

शीर्षक : बचपन 

रंग-बिरंगी तितलियों सा स्वच्छन्द बचपन, 

आसमान में उड़ते परिंदों सा मासूम बचपन, ,

शाख पे खेलती गिलहरी सा शरारती बचपन,

पंख फैला नाचते मयूर सा अल्लहड़ बचपन,

उड़ती सतरंगी पतंगों सा आकाश छूता बचपन,

खुशनुमा बयार संग खिलखिलाता बचपन!

मिट्टी के खिलौनों से खेलता-कूदता बचपन!

रेत में महल बना चहकता-उछलता बचपन,

किनारे पे शंख-सीप चुगता, भीगता बचपन,

कागज़ की कश्ती को खेता, डोलता बचपन!

चंदामामा को देख मुस्कुराता, चहकता बचपन!

सितारों को देख जगमगाता, छुपता बचपन!

बचपन! कहां खो गया वो मासूम बचपन?

मुस्कुराती शोख कलियों का लड़कपन!

शाख पे चहकती चिड़ियों की उछल-कूद!

लड़ते-झगड़ते शेरू-मोती की मस्ती-खेल-कूद,

बारिश में भीगे खगों के पंखों की फड़फड़ाहट!

कजरारे बादलों के बीच बिजली की गड़गड़ाहट!

काँटों भरी पगडण्डी पर नंगे पाँव चलता बचपन!

बस्ता-किताबों का बोझ उठा थका-थका बचपन 

चाचा नेहरू के कोट पे खिले गुलाब सा बचपन!

सिक्कों के दो पहलू सा धवल-श्यामल बचपन!  

राजे-रजवाड़ों के शीशमहल सा चमकता बचपन!

घास-फूंस की कुटिया में रोता-सिसकता बचपन!

आभासी दुनिया में भटकता खोया-खोया बचपन!

खेत-खलियानों, कल-कारखानों में स्वेद बहाता बचपन!

 

कहाँ खो गया अल्हड़, खुशनुमा बयारों बचपन?

बस्तों के बोझतले दबा-दबा सहमा सा बचपन!

कहां हैं वो सुजलाम्-सुफलाम् वसुंधरा का लडकपन?

कहां हैं वो गुनगुनाते, मदमस्त भ्रमरों का गुंजन?

कहां हैं वो गुड्डे-गुड़ियों की शादी की दावतें?

कहां हैं वो परियों के क़िस्से, सपनों की सौगातें?

विकास की दौड़ में, जिंदगी की होड़ में, स्वा:हा न हो बेशकिमती बचपन!

समय से पहले, वक़्त की चोट से,

घायल न हो बच्चों का स्वछंद मन!

 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • आपकी लेखनी प्रशंसनीय है
  • बहुत सुन्दर प्रस्तुति 😍😍❤️😍😍
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।