आओ सखी नमन माँ शारदे🙏🙏
रासावलय छंद आधारित 
रासावलय छंद: षटकल चौकल, षटकल पंचकल पदान्त : 212,122,221
दिनांक : 9-6-2026

आज सखी आओ, हो जाएं मदमस्त।
बचपन को जी लें, खेलों में हो व्यस्त।
दूध-दही न सही, पेड़ों के आम सब।
तोड़ेंगे चढ़-चढ़, लेना मत नाम अब।।

अम्मा की प्यारी, बापू की दुलारी।
कुटिया में रहते, शेरू, मैं, मुरारी।
कर चूल्हा-चौका, गड्ढे पेट के भरे।
घास-फूँस पर सो, सपने सब हो खरे।।

आशा का दोना, बातों का पुलिन्दा।
स्वेद सनी बाला, बोल सुनें चुनिन्दा।
पढ़-लिख कर मुझको, बनना है कलेक्टर।
बापू की लाडो, संभालो रजिस्टर।
 
स्कूल चली सखियाँ, पगडंडी पुरानी।
कच्चे हैं रास्ते, सहेलियाँ सयानी।
मैले हैं कपड़े, मुख पर हैं रोशनी।
नटखट हैं भारी, सखी चित्त चोरनी।।

महल रेत के हैं, लहर कहीं बहा ले ।
अंतस में पलते, स्वप्न-भ्रूण निराले।
बड़े-बड़े सपने, बड़ा-बड़ा आकाश।
छूने नभ आतुर, क्यों न करें विश्वास।।

आग जली हिय में, बेचैनी नैन में।
कैसे हम सोएं, नींद नहीं रैन में।
पाने को मंजिल, हिम्मत ही हैसियत।
जिजीविषा-जीवट, नेक सदा हो नियत ।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।

चित्र राजन धनराज जी से साभार....
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