श्री राम
श्री राम रमापति चरणों में,
वंदन प्रभु वारंवार करूँ।।

पुरुषोत्तम रघुनंदन हो,
मर्यादा पालनहारे हो।।

सुखदाता रघुवीरा हो,
भक्तों के सुमीत सहारे हो।।

अयोध्यापति राघव हो,
दीनों के तारणहारे हो।।

अजरामर अविनाशी हो।
अवधेश करुणासागर हो।।

स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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