उमडे हर्ष तरंग


आयी ऋतु फागण की सजना, लहरे हृदय उमंग।
खेलूं पिया संग मैं होली, हुलरे प्रेम तरंग।।
भीगी चोली, भीगा तन मन, बाजे ढोल मृदंग।
नाचे थिरक थिरक मन मेरा, उमडे नेह सुरंग।।

चंचल जैन
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