कर लो सफाई ..

तर्ज:चुरा ले ना तुमको ये मौसम सुहाना


   कर लो‌  सफाई, एक दीपक जलाना

   रौशन कर लो प्रभु, मन अंगना हमारा

   लुभाता है मुझको ये,पर्व सबसे न्यारा 

  दिवाली के दिन हो‌, हर घरों में  जगारा 

मिले हमको दर्शन प्रकाश  महावीरा 

 तेरे चरणों का हमें, मिलना सहारा

  नहीं हो जीवन में ,किसी को‌ परेशानी 

  अंतर  मन में वो खिलाओ उजियारा

  अंतर मन में वो खिलाओ उजियारा

  कर लो‌  सफाई जी,एक दीपक जलाना

     रौशन कर लो प्रभु, मन अंगना हमारा

   जी कर लो‌ सफाई  एक दीपक जलाना

    रौशन कर लो प्रभु मन अंगना हमारा

फैलाओ न कोई तुम  प्रदुषण ऐसा 

    सांसों में घुले न कोई जहर ऐसा वैसा 

   महावीर की वाणी, रामचंद्र की मर्यादा 

     हटाओ अंधेरा, बहा  ज्ञान की धारा 

    हटा तम अंधेरा ,बहा  ज्ञान की वो‌ धारा 

      रौशन कर लो प्रभु मन अंगना हमारा

    कर लो‌ सफाई तुम  एक दीपक जलाना

      रौशन कर लो प्रभु मन अंगना हमारा


स्वरचित:अशोक दोशी 

सिकंदराबाद

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