माहिया छंद रचना

माहिया छंद

१)
पागल परवाना है,
लौ में जल जाये,
प्रेमी दीवाना हैं। 

२)
बुंदें रिमझिम आयी,
यादें बरसाती,
नैना बदरी छायी।

३)
चंदा ने की चुगली,
साजन की सजनी,
दीवानी हैं पगली।

४) 
हाथों में हाथ धरे,
हम तुम साथ चले,
प्रीती मकरंद भरे।

५)
सतरंगे हैं सपने। 
धरती हैं प्यासी, 
झर झर झरते झरने।

 





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