4 4 6741 4 6741 माहिया छंद रचना माहिया छंद१)पागल परवाना है,लौ में जल जाये,प्रेमी दीवाना हैं। २)बुंदें रिमझिम आयी,यादें बरसाती,नैना बदरी छायी।३)चंदा ने की चुगली,साजन की सजनी,दीवानी हैं पगली।४) हाथों में हाथ धरे,हम तुम साथ चले,प्रीती मकरंद भरे।५)सतरंगे हैं सपने। धरती हैं प्यासी, झर झर झरते झरने। Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared03 Jan 2025 Start 03 Jan 2025 End 03 Jan 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें सोनी सुराना 04-Jan-2025 Comment Like1 बहुत अच्छी तुकांत कविता. बहुत पसंद आई. Yuvit Sonu Jain 02-Mar-2025 Comment Like आपकी लेखनी प्रशंसनीय है Bhavesh Jain 03-Sep-2025 Comment Like वाह! बहुत खूब... 🩷🩷 Sundeep Jain 10-Jan-2026 Comment Like वाह! बहुत खूब... 🩷🩷 माहिया छंद रचना © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें