अंतिम इच्छा!
मेरी भावना:
दोहे!

मुझे जला मत मानवी , दफ़ना  मत प्रिय आज।
बाद मौत के खोल दो, अंगदान का राज।।

मृत्यु भोज की चाहना,  लाती दिल अवसाद।
अस्थि कलश मत भेजना, जल जाने के बाद।।

काम किसी के आ गई, अंग-अंग आगाज।
जीवन दे पूरा करूँ, अदभुत जीवन काज।।

अंतिम इच्छा कामना, पूरी कर दो मान।
भाव वंदना है तुम्हे, वीर-चरण दो स्थान।।

स्वरचित तथा मौलिक,
 कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।



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