तितली

रासावलय छंद आधारित गीत 
रासावलय छंद ( षटकल चौकल, षटकल पंचकल ) 

फूलों को तितली, दे चुम्बन सौ बार।
घोल फिजा में मधु, जतलाती  है प्यार।

पगलाई तितली, उड़े पौध पुचकार।
छूने से नाजुक, पंखुड़ियाँ बेजार ।
रंग बहुत सुन्दर, पाँखों के हैं यार।
सूरज की किरणे, जता रही अधिकार।।

हरियाली धरती, इंद्रधनुषि बौछार ।
घोल फिजा में मधु, जतलाती है प्यार।

कोमल है रिश्ते, अदभुत रति श्रुँगार।
डाल-डाल पर है, पंछी का संसार। 
लुभा रही तितली, बचपन दे विस्तार।
भोलेपन का बन, सक्षम प्रिय आधार।।

पचपन का करती, सकल दूर अँधियार।
घोल फिजा में मधु, जतलाती है प्यार।

भौरे की गुंजन, प्यार भरा इजहार।
सपन दिखा झूठे, जला ह्रदय अंगार।
व्यभिचारी को दे, प्यार नाम मंदार।
तितली दे राहत, मधुकर मति धिक्कार।।

अविरत मधु संचय, करें नहीं प्रतिकार।
घोल फिजा में मधु, जतलाती है प्यार।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
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