कन्यादान

कन्यादान

घर आँगन की कली,
प्रेम स्नेह से है पली,
जायेगी जब ससुराल, 
दिल थाम लिजिए।।

बोल बोले मीठे मीठे,
अमृत सा रस घोले,
पायेगी लाडो सम्मान,
शिक्षा धन दिजिए।।

नव यौवना लाडली,
तितली सी मनचली,
दमकेगी दीपज्योति,
कौशल सिखाइये।।

प्रीत पुष्प हो बहार,
साजन का मिले प्यार,
विवाह बंधन बेला,
कन्यादान किजिए।।

दो कुल की हैं लाज,
सुर, लय, ताल, साज,
बेटी तो धन पराया,
आशीर्वाद दिजिए। ।

स्वरचित  मौलिक  रचना 
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
इस पर लोग क्या कह रहे हैं