नमन माँ शारदेअरुण छंद
मोद से, उल्लसित, भाव हिय शांति का।
मेल से, मन मिले, अंत हो भ्रांति का।।
प्रेम के, रंग में, इंद्रधनुषी जिया।
पुष्पिता, हो धरा, हरितिमा वादियां।।
दंभ का, द्वेष का, क्रोध का नाश हो।
गीत हो, सुरमई, बोल मधु पाश हो।।
त्याग कटु, सोच का, कंटकी कृत्य का।
कर्म सदा, मंगला, भाव हो सत्य का।।
चंचल जैन