बैसाखी की लख लख बधाइयाँ!
शीर्षक : बैसाखी!

पंथ खालसा जन्मा, जश्न मनाने आओ।
बैसाखी का मौका, खूब भाँगड़ा पाओ।।

खेतों में लहराएं, पके धान की बाली।
गिद्दा पा कर देती, कुडियाँ सब को गाली।।
 
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्र
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