रोला छंद


छोटी सी हो बात,  बतंगड़ नहीं बनाना।
कोई झोला छाप, सीख दे, हो न फ़साना।।
लोग तमाशा देख, मजा लेते फोकट का।
तड़पाये जब भूख, मिले दोना भोजन का।। 

स्वरचित मौलिक  रचना 
चंचल जैन
मुंबई,  महाराष्ट्र
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