2 1 4636 2 4636 नेह अमृत झर-झर झरता निर्मल जल हैं,सावन बूंदों की मधुरिम सरगम हैं,मन मयूर नाचे हर्षित छम-छम,भर भर अंजुरी में ले लूँ, अमृत जल हैं।।चंचल जैन Label Directed by द्वारा चंचल जैन Shared28 Jun 2025 Start 28 Jun 2025 End 28 Jun 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 28-Jun-2025 Comment Like बहुत ही सुन्दर प्रकृति वर्णन! नेह अमृत © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें