ज़िन्दगी

यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी |

इसी सिलसिले में कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ |

                                                                                                                                                           

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ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

ये सयानों की दुनियां में नादान रहे हम |

होकर अपनों से अपने से बेसुध बेखबर

लगाके गैरों से ये दिल पशेमान रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

 

न तो उतरे न समझे तेरी गहराइयों को

रहे भटकते  बस यहाँ वहां यूँ ही हरदम |

न तो तुझे न तेरे  हम दस्तूर को समझे

बस बहक गए उधर जिधर ले गए कदम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

 

थी हसरतें कि मिलें कुछ लम्हें सुकून के

बस इतना ही पाने को परेशान रहे हम |

सोचा था जियेंगे ज़िंदादिली से हर रोज़

जिंदा रहने को हर पल हैरान रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

 

रहे आसमाँ पे छोड़ के पैरों से ये ज़मीं

रखीं  ख्वाहिशें बहुत पर सब्र बहुत कम |

जब छूट गई ख्वाहिशें तो देखिये मज़ा

क्या मस्ती से ज़िन्दगी गुजार रहे हम ||

 

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

 

चंद्र मोहन कत्याल

ग्रेटर नॉएडा उत्तर प्रदेश-201310 भारत

 


द्वारा chandra katyal
Shared05 Jul 2026
Start 04 Jul 2026
End 05 Jul 2027
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