तुम दिल के अज़ीज़ हो या मेरा दिल ही हो तुम...
तुम्हें इतना प्यार मैं ही करूं या प्यार के काबिल ही हो तुम...
तुम्हें ढूंढती हर जगह हूं क्यूं जब मेरे हर ख्याल में शामिल ही हो तुम...
तुम्हे करूं बेइंतिहा मोहब्बत या मेरे इश्क के साहिल ही हो तुम...
तुम तुम तुम ही तुम हर ज़र्रे ज़र्रे में मेरे.. तुम्हें पाने की दुआ मैं करूं या मुझे हासिल ही हो तुम..
तुम्हें बताऊं मेरे दिल की बात कैसे मेरे जज्बातों से तो वाकिफ ही हो तुम...
तुम हो सुकून मेरी हर बैचैनी का...हो सहारा मेरी हर नादानी का...
मेरे किस्सों का मेरी हर कहानी का... तुम हिस्सा हो मेरी रवानी का...
मेरे दिल की धड़कन से लेकर मेरी आंखों के पानी का... तुम हो अहसास मेरी हर जुबानी का...
तुम्हें पाना न पाना किस्मत की बात है...पर तुम से रिश्ता है कुछ रूहानी सा...
तुम मुझ में बसे कुछ हिस्से से हो..
जिसे किसी को कह न सकूं वो किस्से से हो...
मुझसे दूर हो कर भी मेरे क़रीब...दो पहलू के एक सिक्के से हो...
मेरी जिंदगी के राज़ में इक राज़ तुम भी हो...
मेरी बंदगी की आस में इक आस तुम भी हो...
तुम मेरे हो या नहीं मुझे ख़बर नहीं..
मेरी ज़िंदगी के काश में इक काश तुम भी हो...
काश वो काश कि काश तुम मेरे होते...
काश तुम्हारे ऊपर वो सारे हक भी मेरे होते....
हक वो तुम्हें देखने का... तुम्हें छूने का...तुम्हे महसूस करने का...
काश कि तुम सिर्फ साथ नही पास भी मेरे होते....
पास भी इतने पास कि तुम्हारे अरमान भी मेरे होते...
मैं होती तुम्हारी और तुम सिर्फ मेरे होते...
मेरे होते तुम तो तुम्हें कहीं जाने ना देती...
देती तुम्हें इतना प्यार कभी आंसू बहाने ना देती....
खुद को सौंप देती तुम्हें और किसी गम को तुम में समाने ना देती...
तुम्हारी हर आस और प्यास होती मुझसे...
और मैं किस्मत को हमारे साथ के बीच आने ना देती....
मलाल है कि ये काश है...पर ये काश मुझे मंज़ूर है...
तुम्हारा चेहरा मेरी दिल की गलियों में मशहूर है...
तुम्हें चाहना मेरी खता या तुम्हें न पाना मेरी किस्मत का कसूर है...
मेरा चांद मुझसे दूर सही पर कहीं किन्हीं ख्यालों में मेरा ज़रूर है...
मेरे ख्यालों की दुनिया के सरताज हो तुम...
मैं आम सी ही सही पर मेरे लिए ख़ास हो तुम...
मेरा रुतबा मेरी महफिल मेरे नाज़ हो तुम...
मेरे ख्वाबों में मैं सिर्फ तुम्हारी और मेरे सदा पास हो तुम.... ❤️