जादु की झप्पी..
काहे बजाओ कान्हा मुरली की धुन?
चली कालिंदी तट राधा सुन प्रीत-धुन!
जादू की झप्पी दो जगत तारणहार!
अमिरस से जीवन-घट भरो पालनहार!
राधा करे विनती, मोरी पूरी करो आस,
मन ही मन हँसे श्याम, कैसी यह प्यास!
श्याम में समाई राधा पाई झप्पी अपार, 
आत्मा लीन परमात्मा में, खुले मोक्ष द्वार!

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।


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