माया नमन माँ शारदे
कुण्डलिया छंद


माया को जग पूजता, वैभव का गुणगान।
रिश्ते फीके से लगे, निर्धन का अपमान।।
निर्धन का अपमान, लड़े भाई-भाई से।
खींचा-तानी   शोर,  होड़  बेपर्वाई  से।।
नेह बिना परिवार, नहीं हैं शीतल छाया।
खोया हैं अब प्यार, ढूँढता ममता माया।।

चंचल जैन
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