आओ! हिल-मिल कर गणतंत्र दिवस मनाएं।देश की अखंडता, एकता का उत्सव मनाएं।
प्रजासत्ताक भारत के संविधान का मान बढ़ाएं।
राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत हो राष्ट्रीय त्यौहार मनाएं।
जन, गण, मन के अधिकारों का संज्ञान ले आएं।
राष्ट्र के सजग नागरिक बन अपने कर्तव्य निभाएं।
देश की उन्नति में योगदान दे राष्ट्र सशक्त बनाएं।
जागरुक मतदाता बन सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र बनाएं।
जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता से संचालित तंत्र।
जल, थल, वायु सेना की समृद्ध विरासत का मंत्र।
अन्नदाता, श्रमिक, बुध्दिजीवी, वैज्ञानिक, शौर्य-शक्ति-यंत्र।
विश्व-पटल पर परचम लहराता सार्वभौमिक प्रजातंत्र।
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर करें राष्ट्रपति संबोधन।
लालकिले से गुंजे देश के प्रथम नागरिक का प्रबोधन।
अतिथि सत्कार, जल-थल-वायु सेना-शक्ति-प्रदर्शन।
देश के वीर-बालक, सूरमाओं का सम्मान, उत्साहवर्धन।
हर बालक, युवा, बुजुर्ग के आत्म सम्मान, गौरव का उत्सव।
गली-गली में गुंजे राष्ट्रगान, ढोल, मृदंग ताल पर नाचे बांधव।
संविधान सर्वोपरि, राष्ट्र-शिखर-पुरुष, गर्वित यौवन-शैशव।
राष्ट्र सर्वोच्च, सदा वंदनीय, निज बलिदान से बढाऊ गौरव।
कुसुम अशोक सुराणा
पवई, मुंबई, महाराष्ट्र