2 1 3827 2 3827 ठहराव(जीवन दर्शन) एहसास एक पल उम्र का सदियां गवाएं बैठा है, जरा ठहरो और देखो यादें छुपाए बैठा है, बचपन जवानी और बुढ़ापा निकल गया हलचल में, न मिला समय रुकने का सब बीत गया पल-पल में, याद करो अपने बचपन को कैसे खेला करते थे, छोटी हो या हो बड़ी हर बात पर लड़ा करते थे, जैसे बीता बचपन बात जवानी पर आयी, मिलने लगा सब कुछ फिर मन में उदासी छायी, उम्मीदों के बोझ पर मन की आशाएं टूट गयी, जीवन के इन संघर्षों में सब यारा-यारी छूट गयी, जब आया समय बुढ़ापे का तो काया साथ ही छोड़ गयी, मन की सभी उम्मीदों पर देखो पानी फेर गयी, फिर भी पागल ये मन उम्मीदें लगाये बैठा है, बेहतर हो ये जिन्दगी ये सपना सजाये बैठा है, एहसास एक पल उम्र का सदियां गवाएं बैठा है । Label Directed by द्वारा Kapil Tiwari Shared05 Sep 2025 Start 05 Sep 2025 End 05 Sep 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Yuvit Sonu Jain 18-Jun-2026 Comment Like वाह! बहुत उम्दा! ठहराव(जीवन दर्शन) © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें