भाग्य रेखाएं!
शीर्षक : भाग्य रेखाएं!
 

भाग्य रेखाएं हो या पत्थरों पर खुदी लकीरें,

मिटती नहीं मिटाने से...  
 
जिगरा चाहिए फौलाद सा,
क़िस्मत खुद बुलंद लिखने को!
भागीरथ प्रयास चाहिए ,
गंगा ज़मीं पर उतारने को!
लक्ष्य पर नज़र चाहिए, 
अर्जुन सा मत्य-संधान को!
हिमशिखरों पर उड़ान चाहिए,
तिरंगा चोटियों पर फहराने को!
 
बिना संघर्ष, बिना जंग,
मंजिलें फतह होती नहीं!
बिना जीवट, जिजीविषा,
सीने पे तमगे सजते नहीं!
 
बढ़ते चलो जीवन-राह पर,
अपनी कहानी खुद लिखो...
भाग्य रेखाएँ चमकेगी जरुर,
स्वेद की बुंदे बहा कर देखो!
 
स्वरचित तथा मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, पवई, मुंबई, महाराष्ट्र
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