कठै गयो वो...

कठै गई वा कजरारी कोयल जी?

कठै गयो म्हारा हिवडा रो हार?

कठै गई वा मोतियों री पायल जी?

कठै गयो म्हारा छैल-छबीलो भरतार?

कठै गयो वो नखराळो मोर जी?

कठै गयो वो चुन्दड़ रो शिंणगार ?

 

कठै गया वे गुटर गुं करता गोरा कबुतर? 

कठै गई महल, मेरियाँ, भेरुजी री पोर?

कठै गया वे फूल, मांडणा,तोरण, वंदनवार?

कठै गया वे आंगन-झूला, साजन चितचोर?

कठै गया म्हारा रंग-रंगीला, बांका जी

सरदार? 

कठै गया म्हारा बिंदिया रा हकदार?

 

कठै गयो वो रंग लाल-केसरियो, फागण रो झणकार?

कठै गया वे ढोल-ढमाका, गेर-घूमर, घोड़ी रा हसवार?

कठै गया वे गुजियां-पेठा, भांग-ठंडाई रा जार?

कठै गया वे छोरा हुंसिला, रणबांकुरा, वीर?

कठै गई वे कान्हा री सखियां, नखराली नार?

कठै गई वे वीरांगनाओं, केसरिया फाग रो अंगार?

 

कठै गयो वो कुम्भलगढ़ रो वीरो, महाराणा सरताज?

कठै गयो वो दिलेर भामाशाह, राजपुतानी बाज़?

कठै गई वा रानी पद्मिनी-सखियां, बळती चिता रो साज? 

कठै गया वे मरुधरा रा हीरा-मोती, सूरज रो आगाज़?

कठै गया वे तपती रेत-बालू में जनमिया, जामन-जाया आज?

द्वारा कुसुम अशोक सुराणा 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं