संतुष्टि में सुकून
उमस भरी दोपहरी में रिमझिम बारिश का आना,
भीगे तन-मन, मिलता है आह्लादित सुकून।।
अकेलेपन की मुरझाती उदास जिंदगी में,
किसी बिछड़े का मिलना, खिलता पुष्प सा सुकून।।
पतझड़ के मौसम में नव पल्लव का आना,
ढलती सांझ में महकती बहार सा सुकून।।
बेरौनक जिंदगी को करता है झंकृत,
आत्मीयता, अपनापन में प्रेम छाँव सा सुकून।।
सुकून संतुष्टि में, सुकून हो अपने हिय में,
सुकून मिले जिंदगी की भूली बिसरी यादों में।।
सुकून मिलता है मनभावन कर्म संस्कार में,
सुकून महकती चहकती प्रकृति की गोद में।।
स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र