महा शशिवदना छंद नमन माँ शारदे 🙏🙏
महा शशिवदना छंद:

चलो आज फिर से, बचपन को जी ले।
मिट्टी के घट से, अमिजल को पी ले।।
उछल-उछल कर यूं , कंचे से खेले।
छुपा-छुपी में यूं, दोस्तों को ठेले।।

कुत्ते-बिल्ली के , पीछे पड़ जाएं।
मस्ती की शाला, पेड़ तले पाएं।।
देख गिलहरी को, दाना दे आएं।
गुड्डा-गुड्डी को, डोली में लाएं।।

 दादा-दादी के, पाकिट से चवन्नी।
नाना-नानी ने,      काटी है कन्नी।।
सब मिल बाराती, दुल्हन लाएंगे।
हो हल्ला होगा, जश्न मनाएंगे।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं