घर की चौखट

घर की चौखट
 
अपनी पाँखे फैला भरना भले ऊंची उड़ान, 
भूलाना न कभी घर की चौखट का सम्मान।।

स्वप्नपूर्ति के लिए, विकासपथ पर चलना,
लांघने पडेगी चौखट, आप मत घबराना।।

आत्मविश्वास से चले, ले अपनों से आशीष,
निरंतर जलधार से बढते चले पथ विशेष।।

कभी हार, कभी जीत, चौखट स्वागत को आतुर,
सुरक्षित, संगठीत घर की चौखट, रिश्ते का आधार ।।

एकसूत्र में बांधे रखे बेजान यह घर की चौखट,
संजोती घर की आन-बान, रोके कर्कश  खिटपिट।।

केवल लकडी या धातु से नहीं बनती घर की चौखट,
अपनत्व, सेवा,  समर्पण भाव से, 
मेल-जोल कराती चौखट।। 
 
स्वरचित  मौलिक  रचना




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