विश्व कविता दिवस की अनन्त बधाइयाँ
धड़कते दिल का स्पंदन है कविता!
उफनते मौजों का शोर है कविता!
संवेदना का मुखर स्वर है कविता!
विरोध का ज्वालामुखी है कविता!
अत्याचार विरुद्ध बुलंद आवाज़ है कविता!
शोषण का धिक्कार है कविता!
पंखुंडियों का श्रृंगार है कविता!
कोमल कोंपलों का सृजन है कविता!
बाज़ की उड़ान का आकाश है कविता!
पक्षिणी के विश्वास का आधार है कविता! 
अंतरिक्ष की गहराइयों का रहस्य है कविता! 
ब्रह्मांड का आदि-अंत है कविता! 
मानवता का सृजन है कविता! 
वैश्विक उदासीनता का आक्रोश है कविता! 
विश्व का ॐकार स्वरुप है कविता!'' 

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।
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