शुक्रिया ये जिंदगी! तेरी दर्यादिली का शुक्रिया!!
जिंदगी के गुल्लक में, नए रुपहले सिक्के का शुक्रिया!
रात के आँचल से झाँकती ... नव प्राची का शुक्रिया! ……
धरती की गोद में पलते .... नूतन बीज का शुक्रिया!
सपनों को धरातल पे लाते .... नवरंगी इंद्रधनु का शुक्रिया!
पत्थरों पर चित्रकारी करती .... नवकल्पना का शुक्रिया !
हौसलों से गगन चूमती … नई उड़ानों का शुक्रिया !
दिमाग़ संग जमीर की ....नित नई जंग का शुक्रिया !
हथेलियों में सजाये कुसुम सम, नए लम्हों का शुक्रिया!
ज़िन्दगी के फलक पर उभरी....नव प्रभात का शुक्रिया!
रच्चणहारे की सौगात.... नूतन वर्ष का शुक्रिया!
शुक्रिया ये जिंदगी! तेरी दर्यादिली का शुक्रिया!!
स्वरचित एवं मौलिक,
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा