मुझे और कुछ नहीं चाहिए...

तर्ज: मुझे तुम से कुछ भी न चाहिए 


मुझे कुछ भी और न चाहिए 

   मेरे मुल्क का विकास हो‌-2

मुझे कुछ भी और न चाहिए 

   मेरे देश  का विकास हो‌-2



     कोई  दीन  हिन हो यदि कहीं 

      उसे  भोजन और  निवास दो-2

       

         मुझे कुछ भी और न चाहिए... 


          दो उनको भी वो एक जिंदगी 

             शख्स हरिक यहां पर खुश रहे

               दो उनको भी वो एक जिंदगी 

             शख्स हरिक यहां पर खुश रहे

                  दो उनको सुरक्षित आशियां 

                 ताकि हरजन यहाॅं महफुज रहे 

                      जो कोई हासिये पे रह गया 

                      उन्हें सलामत कोई मुकाम दो


मुझे कुछ भी और न चाहिए 

   मेरे देश का विकास हो‌-2

     कोई  दीन  हिन हो यदि कहीं 

      उसे  भोजन और  निवास दो-2


मुझे कुछ भी और न चाहिए ...

वो उठाओ कदम जोभी ठोस हो

रहे न  किसी को भी कोई ग़म 

वे उठाये कदम जोभी  ठोस हो

 रहे न  किसी को भी कोई ग़म

    मेरी चाहतें बस इतनी सी है‌

    शासन दिखलाए ऐसा दम‌

  वो कौशल जो कभी खिला नहीं 

    तौर तरिके से उसे तराश दो


मुझे कुछ भी और न चाहिए 

   मेरे मुल्क का विकास हो‌-2

मुझे कुछ भी और न चाहिए 

   मेरे देश  का विकास हो‌-2


स्वरचित:अशोक दोशी 

                        

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