नमन माँ शारदे! 🙏🙏
द्विगुनित सुन्दर छन्द
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पदान्त : गुरु गुरु
भ्रम में मत रहना रे, पाकिस्तानी न्यारे।
वैश्विक निधि से होता, महिमा-मंडन प्यारे।
मूल्य लाश का सिक्के, प्रजा जहां नित हारे।
ना 'पाक' वतन-बन्दे, भटके मारे-मारे।।
डूब रही जब नैया, गैरों का कर थामा।
मदद करें बदले में, पाक अधिपत्य नामा।
मिचमिचि आंखोंवाले, चापलूस हैं भारी।
दगाबाज हैं स्वार्थी, सब मतलब की यारी।।
बल पर बैसाखी के, जंग न जीती जाती।
कंधों पर औरों के, मृत काया ही आती।
गीदड भभकी दे दे, नेता कायर हारे।
देख रात उजियारा, घुटनों पर हैं सारे।।
जोश देख अति ऊंचा, भारतीय सेना का।
पूंछ दबा कर भागा, दुश्मन मिलने आका।
अस्त्र-शस्त्र तैयारी, पड़ी पाक पर भारी।
कब तक वह मिमियाता, लड़ना रखता जारी।।
स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।