बाल गीत

दिल चाहता है...

दिल चाहे, बच्चा बन जाऊं,
खूब खेलूं, मौज मनाऊं।।

खूब करे हम धमा-चौकडी, 
दादाजी की छुपाऊं छडी।।

चिमटी धीरे से नन्हीं को काटूं,
हंस हंस लोटपोट हो जाऊं।।

ले चश्मा पोपली दादीजी का,
मजा लूं शरारती बचपन का।।

छुप जाऊं माँ के आँचल में,
कोई डांटे, खूब आंसूं बहाऊं।।

हर जिद मेरी पूरी करे दादाजी,
खूब मिठाई खिलाये दादीजी।।

मम्मी पापा भी कुछ न कहते, 
प्यार पकौडी हैं सूद-मूल की।।

स्वरचित मौलिक रचनाकार
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर रचना
  • बच्चे के दिल का दर्पण हैं आपकी अभिव्यक्ति!🙏🙏
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।
  • सभी के लिए उपहार है ये पोस्ट
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।
  • बहुत सुन्दर रचना
  • बहुत खूब....