दिल चाहता है...
दिल चाहे, बच्चा बन जाऊं,
खूब खेलूं, मौज मनाऊं।।
खूब करे हम धमा-चौकडी,
दादाजी की छुपाऊं छडी।।
चिमटी धीरे से नन्हीं को काटूं,
हंस हंस लोटपोट हो जाऊं।।
ले चश्मा पोपली दादीजी का,
मजा लूं शरारती बचपन का।।
छुप जाऊं माँ के आँचल में,
कोई डांटे, खूब आंसूं बहाऊं।।
हर जिद मेरी पूरी करे दादाजी,
खूब मिठाई खिलाये दादीजी।।
मम्मी पापा भी कुछ न कहते,
प्यार पकौडी हैं सूद-मूल की।।
स्वरचित मौलिक रचनाकार
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र