नारी शक्ति
महिला दिवस प्रतियोगिता 


नारी ईश की अनुपम कृति 
है ईश अमूल्य उपहार । 

समग्र सृष्टि में नारी जैसा 
नहीं हुआ कोई सृजनहार। 

ममता, समता , स्नेह रंगों से 
किया जीवन का अमिट श्रृंगार। 

गम की चादर ओढ़ सदा ही 
किये सबके सपने साकार ।

महके सदा ही नारी का नारीत्व 
बिखरे कोने कोने से चमन बहार। 

देवों के भी देव धरा पर 
वंदन करते शत-शत बार। 

मॉं , बेटी, बहन, प्रेयसी 
लुटाती अपनी हिय का प्यार । 

परिभाषा संस्कारों की 
समझाती जीवन का सार। 

कदम दहलीज रखी पिया घर 
किये दोनों कुल उजियार। 

जब जगा नारी का नारीत्व 
सतीत्व की रक्षा में किया जौहर अंगीकार। 

दुर्गा , काली , महामाया बन  
हाथों में रखती हथियार। 

पाप भीरुता जब जब बढ़ती 
रणचंडी बन करती हुंकार। 

संकट की घड़ियॉं जब आती 
करती संपूर्ण जगत उद्धार ।
 
उसके गुणों का नहीं है मोल 
लुटा देती अपना भंडार। 

बिन नारी के जग है सूना 
मिट जाता पूरा परिवार। 

नमन हे नारी शक्ति!
करूं मैं तेरा भव्य सत्कार 

नमन हे नारी शक्ति!
वंदन तेरा सौ -सौ बार । 

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