2 1 2714 2 2714 कलम ने जब दुबारा लिखा क्यों इस क़दर कलम ने तुम्हें लिखा था… जिस क़दर तुमने अपने आप को… इंसान के अंदर के हर पहलू को कलम ने समझा था… जैसे तुमने खुद को… पर — क्यों तुमने कलम को उस दिन हाथों में नहीं पाया, जिस दिन तुमने खुद को एक अलग इंसान में पाया था… फिर एक पर्दे के पीछे तुम आ गए, और तुम्हारे भीतर छुपा एक भाग भी आ गया। वो भाग — जिसे लिखने वाला समझा गया था, लिखा था उसने… — लेकिन समझा तुमने अपने कलम से था। कलम ने लब्ज़ को सादगी से दोबारा पकड़ा… तुमने अपने आप को फिर से पाया — एक दिन, जब दोनों खूबसूरती से उसके साथ आए… उस दिन तुमने खुद को मजबूत हाथों में पाया… उस दिन तुमने खुद को फिर से पूरा पाया… फिर से खुद को पूरा पाया… फिर से खुद को पूरा पाया… — Aman Label Directed by द्वारा Aman kumar Shared01 Dec 2025 Start 30 Nov 2025 End 30 Nov 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें कुसुम सुराणा 04-Dec-2025 Comment Like बहुत खूब कलम ने जब दुबारा लिखा © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें