कलम ने जब दुबारा लिखा

 

क्यों इस क़दर कलम ने तुम्हें लिखा था 

जिस क़दर तुमने अपने आप को 

इंसान के अंदर के हर पहलू को कलम ने समझा था 

जैसे तुमने खुद को 

 

परक्यों तुमने कलम को उस दिन हाथों में नहीं पाया, 

जिस दिन तुमने खुद को एक अलग इंसान में पाया था 

 

फिर एक पर्दे के पीछे तुम गए, 

और तुम्हारे भीतर छुपा एक भाग भी गया। 

वो भागजिसे लिखने वाला समझा गया था, 

लिखा था उसनेलेकिन समझा तुमने अपने कलम से था। 

 

कलम ने लब्ज़ को सादगी से दोबारा पकड़ा 

तुमने अपने आप को फिर से पाया 

 

एक दिन, जब दोनों खूबसूरती से उसके साथ आए 

उस दिन तुमने खुद को मजबूत हाथों में पाया 

 

उस दिन तुमने खुद को फिर से पूरा पाया 

फिर से खुद को पूरा पाया 

फिर से खुद को पूरा पाया 

 

                                  — Aman 

 


द्वारा Aman kumar
Shared01 Dec 2025
Start 30 Nov 2025
End 30 Nov 2030
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