इस अंतरराष्ट्रीय कविता दिवस पर, हर किसी के लिए एक पुरस्कार! ✨ हमारे "रचनाओं का संगम" प्रतियोगिता में भाग लें।
📌 विषय: "एकाकीपन से मुक्ति का मेरा लेखन सफर"
हर प्रतिभागी शब्दकुसुम कविता को आगे बढ़ाते हुए 1 से 3 पंक्तियाँ जोड़ सकता है।
अपनी पंक्तियाँ इस पोस्ट में कमेंट पर जोड़कर साझा करें और हमारी कविता को पूर्ण करने में मदद करें! ✍️✨
🏆 प्रतियोगिता की अंतिम तिथि: 25 मार्च 2025
कविता:
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शब्दों की छांव में पाया मैंने एक नया संसार,
शब्दों की रोशनी ने मिटाया मन का अंधकार।
शब्दों के आँचल में मिला, साहित्यिक परिवार,
शब्दों के आगोश में , मिटा दंभ, द्वेष, अहंकार।
'कविता' धूप-छाँव सी बनी मेरी हमसफ़र।
भीग कर बारीश में अश्क़ छुपाने का हुनर,
तन्हाईयाँ देती खुद से मुलाक़ात का अवसर।
शब्दों की छाँव में पाया मैंने एक नया संसार,
अक्षरों की रोशनी ने मिटाया मन का अंधकार।
आई मेरी कलम से एक रोशनी, और हुआ शब्द संचार,
ख़ुशी मिली देखा जब शब्दों का शब्दों संग अच्छा व्यवहार,
मिट गए सब गिले, शब्दों से हुआ कुछ ऐसा प्यार।
लगा जैसे तरसते शब्द थे मिलने को बेकरार।
कमियां थी, शिकायतें थी ज़िंदगी से हज़ार,
जीवन हो गया था जंगल सूना और लोग मिले बड़े खूंखार,
ज़ख्म थे गहरे, फ़िर मिला शब्दों का उपचार।
लेखन आया जीवन में ऐसे, मिला जैसे बिछड़ा यार,
जीवन के एकाकीपन से मिला छुटकारा फ़िर एक बार,
मिली पहचान इन शब्दों से , मिल गया जीवन का सार,
लेखन से हुआ कुछ ऐसा प्यार...!
शब्दों की छांव में पाया मैंने एक नया संसार,
शब्दों की रोशनी ने मिटाया मन का अंधकार
तन्हाई जब सताने लगी
मन ने बुना शब्दों का तार,
मन का अंधेरा छटने लगा
बढ़ने लगा साहित्य में रुझान,
शब्दों की छाँव में पाया मैंने एक नया संसार,
अक्षरों की रोशनी ने मिटाया मन का अंधकार.....