चाॅकलेट
प्यार के रंग (3)
नन्हे को गोद में लेते ही मां बनने की जो मीठी अनुभूति मिली, उससे मीठा कोई पल हो ही नहीं सकता।
गुलाबी गुलाबी चेहरा, छोटे छोटे हाथ पांव।
आंखों में जैसे सारे संसार की मासूमियत। कोमल, सुंदर नन्हा दीप। उसके स्पर्श से स्नेहधारा बरसने लगी। प्रेम आलोक से जीवन दीपित हुआ। मातृत्व सुख तृप्ति सा मीठा पल याद कर आज भी मन में मिठास भर जाती है।
स्वरचित मौलिक कहानी
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र