लम्हा-लम्हा जिंदगी,हथेलियों में समेट,
खिलखिलाया किजिए!
बेवजह गिले-शिकवे,
रुठने-मनाने में,
गंवाया न किजिए!
देहरी पे जलते,
अदना से दीये को,
अनदेखा न किजिए!
प्यार के लफ़्ज़ों को,
धागे में पिरो कर,
फिज़ा महका दिजिए!
जिंदगी का जाम,
जहर या अमिरस,
'चियर्स' कर पीजिए!
जिंदगी धूप-छांव,
जीवट, जिजीविषा से,
सार्थक बना लिजिए!
समय की गुस्ताखियों से,
सबक ले, फौलाद बन,
शिखर सर किजिए!
चिंतामणी सी जिंदगी,
सहस्त्रफणी से पा कर,
मनुष्य भव सुधारिए!
जिंदगी के महाकाव्य को,
अनुभव का संबल दे,
कार्य शाला बनाइए!
आए है दुनिया में तो,
वक़्त की रेत पर,
नाम लिख जाइएं!
जीवन सुवर्ण कलश में,
रजत मुद्राएं भर लाइएं!
जीवन में अमृत घोल,
स्नेहीजनों संग उत्सव मनाइएं!