मनवा चंचल हैं बड़ा, वानर सम हैं काम|
दौड़े घोड़े सा बहुत, रख ले हाथ लगाम||
मंजिल तेरी दूर हैं, चाँद-सितारों पार |
भागीरथ सम यत्न हैं, सफल मनुज का सार!
त्याग, समर्पण के बिना, नहीं प्रेम का मोल |
वैर भाव तज दे क्षमा, मन की गांठे खोल ||
क्यों दहेज का लालची, है सारा संसार?
मानवता का कर दहन, मनुज करें हद पार!
गीता श्रीहरि ने सुना, दिया पार्थ को ग्यान (ज्ञान)|
त्याग, समर्पण की कथा, खींचे सबका ध्यान!
भस्मासुर सा लीलता, दानव बड़ा दहेज |
परिणय बेला शुभ घड़ी, करता धूमिल तेज ||
कुसुम सुराणा