भगवान आदिनाथ व उस काल की परिस्थितियों को वर्णित कर गाने का प्रयास

जैन धर्म के परम प्रवर्तक, प्रथम तीर्थंकर, त्यागी, वितरागी परम तपस्वी परमेश्वर सिद्ध अरिहंत,

योगी, भगवान आदिनाथ जी  की, गुणगाथा व उस अद्भुत अलौकिक आत्मा एवं उस  अलौकिक काल की  स्तिथियाॅं, श्रमण धर्म की स्थापना व भगवान आदि देव अरिहंत ने‌ कैसे अपना जीवन‌ यापन‌ किया, कैसे  सिद्धियां प्राप्त की, 

भव भ्रमण  यानी संसार  सागर के चक्र से उन्हे कैसे मुक्ति मिली ,

उस पर मंथन‌ कर  गुंथन  करने की मुझ अकिंचन की  कोशिश ताटंक छंद में... 

मैंने आम जिज्ञासु की तरह मुझ ही से,मैंने प्रश्न किये,मेरी अल्प मति व मेरी जो भी सतही जानकारी, मेरी धर्मानुरागी माॅं स्वर्गिय तारा देवी से प्राप्त हुई थी , उनके दिव्य आशीष से‌ प्रयास किया मेरे भावों को शब्दों में संजोने  का उसे गाने का। 

हालांकि मैं इस काबिल नहीं हूॅं कि उस अलौकिक आत्मा व अरिहंत भगवन् के बारे में कुछ लिख सकूं। नहीं मेरी आवाज़ में वो देवत्व वो सत्व व तत्व है , फिर भी प्रयास करने की जुर्रत की है ।


यह मेरा छोटा सा कवित्व मेरे लेखन प्रयास 

व मेरे अभ्यास का हिस्सा है , मुझे क्षमा करें मेरे छंद  में कहीं कोई त्रुटियां हो तो,बेझिझक मेरा मार्गदर्शन करें।


तो प्रस्तुत है मेरी रचना 

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर प्रस्तुति 😍😍❤️😍😍
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।