हिन्दी है अभिव्यक्ति की भाषा,उतुंग हिमालय सी अभिलाषा!
हिन्दी से सुरभित अष्ट-दिशा!
गंगा, जमुना, गोदा की आशा!
संस्कृत जननी, शब्द-खजाना!
उर्दू, तमिल, मैथिली हैं बहना!
क्षेत्रीय भाषा का सागर में समाना,
हिन्दी का महासागर बन बहना!
आदान-प्रदान, विचार-समागम!
असंख्य हृदय की सुरमय सरगम!
हिन्दी है राजा-रंक की धड़कन!
मानवता का अलहद, अक्षय स्पंदन!
हिन्दी है नवपल्लव, मधुमय किसलय!
ज्ञानदीप का औरा, तेजोमय अनुनय!
अंत्योदय से जीवन सुगम, सुखकर!
अन्याय, आक्रोश, पीड़ा करें मुखर!
हिन्दी! साहित्यकारों की प्रियंवदा!
हिन्दी! नीतिकारों की सखी सदा!
हिन्दी! स्नेह-प्रीत की रेशम डोर!
हिन्दी! अरुणोदय-सुसज्जित भोर!
द्वारा कुसुम अशोक सुराणा, पवई, मुंबई महाराष्ट्र!