2 2 5744 2 5744 सरसी छन्द... सदा आगमन नूतन संवत, लाता है आनन्द।गुड़ी पाड़वा उत्सव करता, जगत चाक़-चौबन्द।।अनुपम स्वरुप सृष्टि का देखो, भाएं जीव अपार।मन में 'मोहन वीणा' बजती, रचती सरसी छन्द।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई। Label Directed by द्वारा कुसुम सुराणा Shared30 Mar 2025 Start 30 Mar 2025 End 30 Mar 2030 The Critic’s Corner इस पर लोग क्या कह रहे हैं टिप्पणी लिखें Yuvit Sonu Jain 18-Apr-2025 Comment Like वाह खूब! ❤️🙏❤️🙏❤️🙏❤️ Yogesh Jain 24-Jun-2025 Comment Like वाह! बहुत सुन्दर सरसी छन्द... © टिप्पणी 400 characters remaining जमा करें रद्द करें