दोहावली

मनोहर प्रकृति 

1)
आयी हैं रवि रश्मियां, तेजस सुंदर रूप।
जग सारा चेतन हुआ, हल्की हल्की धूप।।

2)
इतराती कलियां खिली, पट घूंघट के खोल।
गुनगुन करते भंवरे, जीवन में मधु घोल।।

3)
नील गगन में विचरते, पंछी गाये गीत।
बादल रिमझिम बरसते, धरा मिलन की रीत।।  

4)
चहुँ दिशि छायी हरितिमा, रंगबिरंगी फूल।
रूप मनोहर प्रकृति का, मौसम हैं अनुकूल।।

5)
पात-पात हैं डोलती, महके संग बयार।
अनुरागी मन गा रहा, राग मधुर मल्हार।। 

स्वरचित मौलिक रचना
चंचल जैन
मुंबई, महाराष्ट्र
इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • मनमोहक प्रकृति को शब्दों से बयाँ करते सुन्दर दोहे! बधाई चंचल जी!
  • बहुत खूब वीणा जी! पुरानी स्मृतियों में आँसू और मुस्कान का इंद्रधनुषी जलवा नज़र आता हैं।